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एकलव्य विद्यालय जामली की आदिवासी छात्राओं के कथित जातीय अपमान एवं मानसिक प्रताड़ना की निष्पक्ष जांच की मांग


बड़वानी/सेंधवा। सेंधवा तहसील के जामली स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत आदिवासी छात्राओं के साथ कथित रूप से जातीय एवं अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में बिरसा फायटर्स संगठन के राज्य उपाध्यक्ष गणेश खर्डे द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त, जिला कलेक्टर बड़वानी, सहायक आयुक्त जनजातीय विकास विभाग, परियोजना अधिकारी एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना सेंधवा, पुलिस अधीक्षक बड़वानी तथा संबंधित सक्षम प्राधिकारी को ई-मेल के माध्यम से शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, विद्यालय में कुछ शिक्षकों अथवा संबंधित कर्मचारियों द्वारा आदिवासी छात्राओं की शिक्षा को लेकर कथित रूप से हीन भावना पैदा करने वाले तथा अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। छात्राओं से कथित तौर पर “आदिवासी लड़कियों को पढ़ाने से क्या फायदा? तुम्हारी शादी तो हो ही जाएगी, शिक्षा प्राप्त करके तुम क्या करोगी?” जैसे वक्तव्य कहे जाने की शिकायत है।

इसके अलावा, कुछ छात्राओं के साथ उनकी आदिवासी/जातीय पहचान को लेकर कथित रूप से अपमानजनक एवं जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
बिरसा फायटर्स ने कहा है कि आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित आवासीय विद्यालय में इस प्रकार की शिकायतें अत्यंत गंभीर हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे छात्राओं के सम्मान, आत्मविश्वास, समानता और शिक्षा के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का गंभीर विषय सामने आता है।

संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। छात्राओं के बयान महिला अधिकारी की उपस्थिति में बाल-संवेदनशील एवं सुरक्षित वातावरण में दर्ज किए जाएं। साथ ही संबंधित शिक्षकों, प्राचार्य एवं कर्मचारियों के बयान लेने के साथ विद्यालय के उपलब्ध CCTV फुटेज, रिकॉर्ड एवं अन्य आवश्यक साक्ष्यों की जांच की जाए।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता छात्राओं पर किसी भी प्रकार का दबाव, धमकी या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होने देने तथा उन्हें आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई है। आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई तथा दोषी पाए जाने वाले शिक्षक-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई करने की मांग की गई है।

इसके साथ ही प्रभावित छात्राओं को आवश्यक मनोवैज्ञानिक परामर्श एवं शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने तथा विद्यालय में भविष्य में जातीय, सामाजिक या मानसिक भेदभाव की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी भेदभाव-विरोधी व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली लागू करने की मांग की गई है।

गणेश खर्डे ने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने और अपने भविष्य का निर्माण करने का समान अधिकार है। छात्राओं को शिक्षा से हतोत्साहित करने वाले कथित वक्तव्य गंभीर चिंता का विषय हैं। प्रशासन को मामले को तत्काल संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच के माध्यम से सत्य सामने लाना चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

बिरसा फायटर्स ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन द्वारा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

जारीकर्ता:
गणेश खर्डे
राज्य उपाध्यक्ष, बिरसा फायटर्स

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